रिक्से में माँ का शव लेकर रिक्से में घूमता रहा आदिवासी बेटा

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सहडोल।
भले ही देश को आजाद हुए 76 साल हो गए लेकिन आज भी लोगो को आज भी आजादी नही मिली, और लोग गुलामी की जिंदगी जीने को विवश है। सरकार के दावों की पोल खोलती यह तस्वीर मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के बुढार ब्लाक से सामने आई है। जंहा माँ की मौत के बाद शव वाहन नही मिलने से विवश आज एक आदिवासी बेटा अपने माँ के शव को रिक्से में लेकर 5 किलो मीटर का सफर तंय कर बुढार अस्पताल से पीएम करा घर लाया और ले गया, इस दौरान आजादी का जश्न मना रहे लोग इस तस्वीर को देख सरकार को कोसते नजर है।

जिले के बुढार ब्लाक के चिटुहला ग्राम के रहने वाले आदिवासी समुदाय के कैलास कोल की 70 वर्षीय माँ की कुए में डूबने से मौत हो गई थी, जिसका पीएम कराने के लिए बेटा कैलास शव वाहन के लिए यहां वहां भटकता रहा ,जब वाहन उपलब्ध नही हुआ तो विवश बेटे ने माँ के शव को एक रिक्सा में रखकर 5 किलो मीटर का सफर तंय कर आबादी के बीच बुढार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर शव का पीएम करा वापस रिक्से में घर ले गया , शव वाहन नही मिलने से नारजा बेटा सराकर को कोसते नाजार आया।
एक ओर जंहा आज पूरा देश 15 अगस्त स्वतंत्रा दिवस मना रहा था तो वही दूसरी ओर एक बेटा अपनी माँ का शव लेकर सड़को में घूमता रहा , और लोग तमाशाबीन बने देखते रहे…

वही इस पूरे मामले में जैतपुर विधानसभा क्षेत्र की भजापा विधायक मनीषा सिह का कहना है कि लगातार इस तरह की समस्या आ रही है। अस्पतालों में शव वाहन हिने के बाबजूद भी स्वास्थ्य अमला शव वाहन उपलब्ध नही करा पा रहे ,यह चिंता का विषय है । मामला अब संज्ञान में आया है तो इस पर एक्शन लिया जाएगा।

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