अगर आज हुए चुनाव तो जिले में किस पार्टी का होगा सूपड़ा साफ़…? जिले की 4 विधानसभा सीटों के चुनाव के संभावित परिणाम…!

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सीधी(शालिक द्विवेदी)।

विधानसभा 2023 का चुनाव नजदीक है। अक्टूबर के प्रथम पखवाड़े में आदर्श आचार संहिता लगने की संभावना है।
ऐसे में सभी दल पूरे प्रदेश में अपना जोर लगा रहे हैं। जहां एक तरफ सत्तारूढ़ दल भाजपा 6 माह पूर्व हुए आपमे ही पार्टी के आंतरिक सर्वे में अल्पमत में दिखाई दे रही थी उसके बाद से ही भाजपा आलाकमान के निर्देश पर प्रदेश के नेताओं की करो या मरो की स्थिति देखी जा रही है। उसके बाद लगातार विभिन्न विभागों जैसे रोजगार शहायक, सचिव, अतिथि शिक्षक, कोटवार, संविदा कर्मी, कालेज के संविदा प्राध्यापको आदि विभागों के वेतन और अन्य सुविधाये लगभग दुगनी कर दी। शिवराज सरकार ने सबसे बड़ा ट्रम्प कार्ड लाडली बहना, लाडली बहना आवास और लाडली बहनों को 450 रु में गैस सिलेंडर योजना से महिला वोटरों को अपने पक्ष में करने का सकारात्मक प्रयास किया है। तबसे प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिल रहा है।
इसके बाद से जहां प्रदेश में बीजेपी अपने ही सर्वे में मात्र 80-100 सीट में सीमित हो रही थी वह तमाम समाचार चैनलों के सर्वे में अब 100-110 सीट व कांग्रेस 110 से 120 सीट के आंकड़े दिखाए जा रहे हैं।
हालांकि हमेसा सर्वे सही नही होते लेकिन बहुतायत में सर्वे के हिसाब से ही लगभग सीटें आती हुई देखी गयी हैं।
हालांकि कल मैं db लाइव का सर्वे देख रहा था जिसमे विंध्य से कांन्ग्रेस को 18-20 सीट तो भाजपा को 10-12 सीट दिखाया जा रहा था। लेकिन यह सर्वे किस आधार पर था ! उसमे बहस करने वाले पैनल में विंध्य का कोई जानकार न होकर निवाड़ी क्षेत्र के पैनलिस्ट चर्चा कर रहे थे जबकि विंध्य में इस बार कांग्रेस व भाजपा की लगभग बराबर सीटें आ सकती हैं या फिर भाजपा/कांन्ग्रेस क्रमशः 17/13 के अनुपात में आ सकती हैं। विंध्य ही प्रदेश में किसकी सरकार होगी इस बात का निर्णय करेगा यह तो तय है। सनद रहे- पिछली बार भाजपा के भारी विरोध के बावजूद कांन्ग्रेस विंध्य में 30 में से महज़ 6 सीट जीत सकी थी। अगर कांन्ग्रेस विंध्य में 20 सीट से कम आई तो भाजपा की सरकार बनने का रास्ता भी काफी हद तक साफ हो जाएगा। क्योकि तमाम चैनल के सर्वे विंध्य को लेकर सायद भृमित हैं।

जहां तक बात करें सीधी जिले की तो 2018 के चुनाव में मेरे द्वारा विंध्य न्यूज 18 के लिए सर्वे किया गया था, और वह सर्वे पूर्णतयः सत्य साबित हुआ था। पिछले सर्वे में था कि धौहनी से भाजपा लगभग 5 हजार मत से जीत सकेगी तो चुरहट से कांन्ग्रेस इतने ही मत से हार का सामना करेगी। वहीं शिहावल में कांग्रेस की एकतरफा जीत व सीधी विधानसभा से भाजपा को 10 हजार प्लस वोट से जीत का सर्वे रिपोर्ट दिया था। हालांकि सीधी भाजपा करीब 20 हजार मतों से जीती थी लेकिन सर्वे में मत का अंतर मात्र सीधी में था , जीत/हार का दावा सच था।

सीधी के 2023 वि.स. में क्या होगा?

1…..सीधी-

जिले में सीधी विधानसभा विगत 2 दशक से सबसे हॉट सीट मानी जाती है। पूरे विंध्य की नज़र इस सीट पर होती है उसका कारण जिले के कद्दावर नेता केदारनाथ शुक्ल भाजपा से इस विधानसभा से चुनाव लड़ते हैं। हालांकि स्व्भाव से अक्खड़ मिजाज श्री शुक्ल को उनके क़रीबी भी कई बार हराने की अंदरखाने कोशिश करीब एक दशक से करतेएक रहे हैं लेकिन भाजपा नेतृत्व के पास हालफिलहाल उनका कोई विकल्प नही है। ऐसे में अगर उन्हें टिकट मिलता है तो इस बार मुकाबला थोड़ा कड़ा होगा लेकिन यह सब तय करेगा कि कांग्रेस से टिकट किसे मिलता है! अगर टिकट की स्थिति पिछली बार जैसी रही तो इस बार भी जीत की गेंद भाजपा के ही पाले में जाएगी।
हालांकि कुछेक वजहों से उनके ज़मीनी वोटर कम हुए हैं फिर भी जीत के लिए अभी भी सर्वे में भाजपा के लिए जो मत दिखाई दे रहे हैं वह पर्याप्त हैं। कुल जमा आज के हालात में अगर चुनाव हुए तो श्री शुक्ल इकाई हजार मतों से चुनाव जीत सकते हैं।

2…धौहनी..!

विगत चुनाव में धौहनी से भाजपा के जीत के मतों का अंतर बहुत कम था। आम मतों से जीत की संख्या मात्र 3700 के लगभग था। कुल जमा बहुत करीबी मुकाबला था। उसकी सबसे बड़ी वजह सिटिंग विधायक का आम वोटर्स से कट जाना और कुछेक खास लोगो से घिरे रहना मुख्य वजह थी।
लेकिन इन वजहों को गंभीरता से लेते हुए वर्तमान धौहनी विधायक कुँवर सिंह टेकाम पूरे 5 साल जनता के सम्पर्क में रहे। वादा के अनुसार मड़वास को फुल तहसील, व ख़स्ताहाल दादर खाम्ह मार्ग का निर्माण मड़वास को कॉलेज जैसे किये हुए वादों को पूरा किया, जिससे आम वोटर्स की काफी हद तक नाराज़गी दूर हुई है।
वहीं दूसरी ओर कांन्ग्रेस धौहनी से अभी तक जबकि अचार संहिता लगने में कुछ दिन ही शेष हैं, कोई अदद प्रत्यासी तक नही घोषित कर पाई। जो अपना खर्च कर भाजपा से लड़ने की खुलकर रणनीति बना सके , साथ ही अपने ही दल के असंतुस्टों को मैनेज कर पाते। कांन्ग्रेस हमेसा से यःहाँ के प्रमुख 2 या 3 दावेदारों को भृम में रखती रही है। जो 5 साल मेहनत करे या न करे टिकट किसे मिल जाएगा ये कोई नही जानता। इसलिए इस एक दशक में कोई भी कंग्रेसी नेता खुलकर खर्च न आंदोलन में किया न ही मीडिया अटेंशन ले पाया। इसका भी लाभ हमेसा धौहनी भाजपा को मिलता रहा है। हालांकि धौहनी विधायक पर कुछ खास सिपहसलारों के इशारे में काम करने के आरोप अभी भी लगते रहे हैं और उससे भाजपा को नुकसान होने की आशंका भी क्षेत्र में जताई जा रही है। ब्यापारी वर्ग की नाराजगी व कुछ अपनो के ही कारण ख़ेमेबाजी, क्षेत्रीय व जिलास्तरीय मीडिया नाराजगी की भी आशंका से इंकार नही किया जा सकता। फिर भी धौहनी विधायक को अन्य कई कारणों से लाभ होता हुआ दिखाई दे रहा है जिससे वह चुनाव जीत सकते हैं। लेकिन कांग्रेस भी अबकी धौहनी में कुछ हद तक संगठित रहकर चुनाव लड़ेगी इसलिए चुनाव वर्तमान धौहनी विधायक के जीत के संभावना के साथ ही फिर से टक्कर का होगा।
बहरहाल अचार संहिता के पूर्व और सटीक सर्वे प्रस्तुत किया जायेगा।

3….चुरहट-!

जिले की चुरहट सीट भी विंध्य की हॉट सीट मानी जाती है क्योंकि यहां से पूर्व मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री रहे दिग्गज कांग्रेसी नेता स्व. अर्जुन सिंह के पुत्र अजय सिंह राहुल चुनाव लड़ते हैं। हालांकि लगातार 2 चुनाव क्रमशः विधानसभा व लोकसभा के हारने के बाद से भाजपाइयों के हौसले बुलंद है फिर भी इस विधानसभा चुनाव की बात करें तो यह चुनाव भी लगातार मिल रही सूचनाओं व सर्वे के आधार पर अजय सिंह राहुल के लिए इस बार भी जीत की राह आसान नही होगी। जहाँ यह सीट कांन्ग्रेस 3 माह पूर्व तक करीब 10 से 15 हजार मतों से जीत रही थी वह अब लाडली बहना योजना व वर्तमान विधायक की सुशिक्षित पत्नी की सूझबूझ व महिलाओं के बीच अच्छी पकड़ के कारण प्लस- माइनस बराबर की स्थिति हो गयी है।
रही सही कसर चुरहट में तेजी से पैर फैला रही आम आदमी पार्टी पूरी कर रही है। यह सबसे ज्यादा नुकसान कांन्ग्रेस का ही करेगी। क्योकि कांग्रेस के पास कोई संगठन नही है। आम वोटर ही कांन्ग्रेस कि मूल पूंजी है । उस मूल पूंजी का सबसे ज्यादा क्षय आम आदमी पार्टी कांग्रेस का ही करेगी। इसके उलट भजपा कैडर बेस पार्टी है। बूथ से लेकर पन्ना प्रमुख तक हर बूथ में आधा सैकड़ा सक्रिय कार्यकर्ता है जो कि चुरहट कांग्रेस के कुल नेताओं/कार्यकर्ताओ के बराबर भाजपा के मात्र 25 प्रतिशत बूथ के कार्यकर्ता ही पूरे विधानसभा के बराबर हो जाते हैं।

कुल जमा चुरहट में फिर भाजपा के जीत का परचम लहरा सकता है। अभी बहुत कुछ बदलाव भी होगा क्योकि मामला टक्कर का है।

फिलहाल सटीक सर्वे अचार संहिता के पूर्व स्प्ष्ट रूप से दिया जाएगा।

4- शिहावल..!

सीधी जिले की शिहावल विधानसभा सीट विगत कई पंचवर्षीय से कांन्ग्रेस के लिए सबसे सुरक्षित सीट मानी जाती रही है। विगत चुनाव में भाजपा से शिवबहादुर सिंह व कांग्रेस से कमलेश्वर पटेल मैदान में थे। कामलेस्वर पटेल को करीब 32 हजार मतों से विजय श्री हासिल हुई थी।
यःहाँ गौरतलब यह भी है कि भाजपा से ही बगावत कर विश्वामित्र पाठक निर्दलीय चुनाव मैदान में कूद पड़े थे। जिन्हें 28 हजार से ज्यादा मत मिले थे। यह मत किसी भी उम्मीदवार के वृहद ब्यक्तित्व को दर्शाते हैं। वही भाजपा से घोषित उम्मीदवार को 32 हजार मत मिले थे। अगर इन दोनों मतों को जोड़ दिया जाय तो करीब 60 हजार मत होते हैं और बगावत की स्थित में कांग्रेस को तब 64 हजार मत मिले थे। यानी भाजपा के ब्यक्तित्व और पार्टी दोनो मतों को जोड़ दिया जाय तो जीत हार का मामला सिर्फ 4 हजार मतों का बनता है। हार जीत का बहुत करीबी मामला है। इसलिए अगर जैसी की सूचनाएं मिल रही हैं कि शिहावल से विश्वामित्र पाठक को टिकट मिल सकता है ऐसी स्थिति में मुकाबला बहुत करीबी, टक्कर का और रोचक होगा। बहुत सम्भव है कि कांग्रेस शिहावल से चुनाव हार भी जाय। उसके ठोस 2 कारण हैं पहला- विश्वामित्र पाठक हर वर्ग और पार्टी कार्यकर्ताओं में अच्छी पकड़ है। दूसरा…..इसे सोसल मीडिया में कहना उचित नही होगा क्योकि यह अंदर की बात है।
ख़ैर! अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा लेकिन टक्कर तो तय है और जीत हार का मामला भी सिर्फ एकतरफा न होकर इकाई हजार का होगा।

यःहाँ एक बात और गौर करने की है। लाडली बहना योजना को भले ही कांन्ग्रेस कुछ भी बोलकर भाजपा का विरोध करती हो लेकिन वह महिला वोटर्स को यह समझाने में असफल दिखाई दे रही है कि लाडली बहना योजना बेकार, अनुपयोगी है। कंग्रेसी महिला वोटर्स को यह समझाने में असफल रहे हैं कि उनकी सरकार उन्हें 1500 देगी। भाजपा ने पहले ही एक हजार सुरु कर चुनाव तक 1500 देने की रणनीति पर काम कर रही है।
अकेले यही योजना हर एक विधानसभा में कम से कम 5 हजार मत भाजपा के पक्ष में दिलाने में सक्षम दिखाई दे रही है जो कि भाजपा के लिए संजीवनी का काम करेगी। हर विधानसभा में 20 हजार से ज्यादा लाडली बहनाएँ हैं, उनमें से बहुत सम्भव है कि 5000 मत तो मिल ही जायेगे। औऱ यह 5 हजार मत भाजपा की हर सीट पर उम्मीदवार को मजबूत कर सकती है।
इसलिए अब जिले की चारों सीटों में कांग्रेस के लिये संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

नोट- यह आंकड़े सभावित उम्मीदवारों, विभिन्न मुद्दों, पुराने राजनैतिक गणित, अन्य तथ्यों पर आधारित है, और संभावित है। जैसे ही पार्टियां आधिकारिक रूप से उम्मीदवार घोषित करेंगी, वैसे ही जिले की चारों विधानसभाबार मत सहित सर्वे प्रस्तुत किया जाएगा।

आलेख- शालिक द्विवेदी। पात्रकार/ सामाजिक कार्यकर्ता। सीधी। मध्यप्रदेस-9752405600

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