एक पंचवर्षीय में लालचंद की लालिमा दो बार हुई भंग…! पहले भाजपा तो अब कांग्रेस से हुआ मोहभंग… ✍️शालिक द्विवेदी।

Spread the love

सीधी।
कहते हैं राजनीति में सबकुछ हमेसा के लिए कभी भी स्थायी नही होता। राजनीति में हमेसा के लिये न कोई दोस्त होता है न कोई दुश्मन। चाहे वह दोस्ती दुश्मनी ब्यक्ति से हो अथवा दल से।
ऐसा ही वाकया जिले की राजनीति में इस समय देखने को मिल रहा है।
पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी ने अजय सिंह राहुल को उम्मीदवार बनाया था और तभी भाजपा के जिलाध्यक्ष सहित विभिन्न पदों पर रह चुके लालचंद गुप्ता ने भाजपा से इस्तीफा देकर कांन्ग्रेस पार्टी व राहुल भैया का दामन थाम लिया था। कारण सायद रहस्यात्मक स्वार्थपरक ही रहे होंगे इसीलिये तो आजतक जिले की जनता आज तक पलटी मारने को वजह नही जान पाई।
और ठीक 5 साल बाद अब जब पुनश्च लोकसभा चुनाव होने हैं तब अन्य नेताओं की तरह फिर से उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। बहरहाल वह अभी किसी पार्टी में नही गए हैं लेकिन आगे उनका क्या कदम होगा यह उनके चाह और इस्तीफे को वजह को स्प्ष्ट कर देगा।
बहरहाल भाजपा भी उन्हें लेने के मूड में नही है। हाल में ही भाजपा के राज्यसभा सांसद रहे अजय प्रताप ने पार्टी से इस्तीफा दिया तो कांन्ग्रेस विधायक अजय सिंह राहुल की प्रतिक्रिया क़ाबिलेगौर थी। उन्होंने कहा कि- हालांकि उन्हें(अजय प्रताप) कांग्रेस में आना हो तो आ जाएं, लेकिन जरूरत नही है।
यही हालात वर्तमान में भाजपा में भी हैं। हालांकि भाजपा तिनके को भी अनुपयोगी नही समझती। वह सत्ता, संगठन संचालन के गुर जानती है इसलिये सायद वह लालचंद के शेष गुर को भले ही पार्टी में लेकर भुना ले परन्तु वह अभी अन्य किसी दल में जाने की कोई आधिकारिक घोषणा नही किये हैं इसलिये यह सब तथ्य भविष्य हेतु सुरक्षित हैं।

क्या होगा अगर लड़ गए निर्दलीय चुनाव?

लालचंद गुप्ता की वर्तमान में किसी पार्टी में पकड़ हो न हो लेकिन गुप्ता समाज के वोट पर उनकी अच्छी पकड़ है। विगत लोकसभा चुनाव में मुहल्ला सभा कर कर के जहां भी वैश्य समाज के बहुतायत मत थे उन्हें कांन्ग्रेस के पक्ष में करने बखूबी मेहनत किये थे। ऐसे में अगर वह निर्दलीय या अन्य क्षेत्रीय दल से लोकसभा चुनाव लड़ते हैं तो ऐसी स्थिति में भाजपा व कांग्रेस दोनो को नुकसान हो सकता है। वह क्षत्रप उम्मीदवारों की अपेक्षा अधिक मत हासिल करने में सफल भी हो सकते हैं। और कांग्रेस को अधिक नुकसान होने को संभावना है। फ़िलहाल उनके भाजपा में आने जाने से कोई विशेष लाभ या हानि होता नही प्रतीत हो रहा।
बहरहाल राजनीति में सबकुछ जायज़ है और उनका अगला कदम उनका राजनैतिक भविष्य तय करेगा।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *